ज़िन्दगी को ऐसे जीना,
ज्यों बूंद-बूंद बरसात हो,
जीने की चाहत,प्यास तुम्हारी,
और सागर तक का साथ हो !!
फिर अनजान कहाँ हम तुम,
कुछ हममे भी तो बात हो,
पर बैठे हो तुम ऐ हमराही,
ज्यों बुलबुलों का साथ हो !!
क्षणिक साथ,क्षण भर की चाहत,
फिर दर्द के पास आने की आहट,
दिल को ऐसे डरा देती,
ज्यों बिजली की सौगात हो,
जीने की चाहत,प्यास तुम्हारी,
और सागर तक का साथ हो !!
एक पल में अपना फिर पराया,
ज्यों छटता हो बादल का साया,
फिर निखर के आती चमक चांदनी,
ज्यों महफ़िल में माहताब हो !!
जीने की चाहत,प्यास तुम्हारी,ज्यों बूंद-बूंद बरसात हो,
जीने की चाहत,प्यास तुम्हारी,
और सागर तक का साथ हो !!
फिर अनजान कहाँ हम तुम,
कुछ हममे भी तो बात हो,
पर बैठे हो तुम ऐ हमराही,
ज्यों बुलबुलों का साथ हो !!
क्षणिक साथ,क्षण भर की चाहत,
फिर दर्द के पास आने की आहट,
दिल को ऐसे डरा देती,
ज्यों बिजली की सौगात हो,
जीने की चाहत,प्यास तुम्हारी,
और सागर तक का साथ हो !!
एक पल में अपना फिर पराया,
ज्यों छटता हो बादल का साया,
फिर निखर के आती चमक चांदनी,
ज्यों महफ़िल में माहताब हो !!
और सागर तक का साथ हो !!
दिलवाला......