Monday, October 17, 2011

...दिल की हशरत...


दिल में एक हशरत है बाकि,
की दम तेरी बांहों में निकले,
जो पल तेरी आरजू में गवाए हमने,
वो पल तेरी पलकों की पनाह में मिले,

जाते हुए भी चूम लू तेरी हथेलियों को,
तेरी गेसुओं की छांव भी अपने साथ ले लूँ,
ये वक़्त रेत है, यूँ ही फिसलता जायेगा,
जीवन के आखिरी पल में, इतना तो तेरा साथ ले लूँ,

मिन्नत खुदा से बस इतनी सी है,
की तेरी यादों के पल यहाँ भी मिले, वहां भी मिले,
जो पल तेरी आरजू में गवाएं हमने,
वो पल तेरी पलकों की पनाह में मिले,

दिल में एक हशरत है बाकि, की दम तेरी बाँहों में निकले.... 
                                                                                                                                                             दिलवाला...

Saturday, August 6, 2011

......दोस्त.....

एक दोस्त मिला ऐसा जिसने वफ़ा किया,
सौ ज़ुल्म हुए उसपे, उसने न कुछ कहा,
एक दोस्त मिला ऐसा जिसने वफ़ा किया..

मैं बेखबर था उससे दुनिया की रंग में,
वो साया बन के रहता था हरदम संग में,
एक आंधी चली अचानक, जिसकी न थी खबर,
वो बोल के चला गया तुझे लग जाये मेरी उम्र,
मेरी दोस्ती की खातिर सबको भुला दिया,
एक दोस्त मिला ऐसा जिसने वफ़ा किया...
एक दोस्त मिला ऐसा जिसने वफ़ा किया...


"मेरे दोस्त, मुझे तुम्हारी बहुत याद आती है...."
                                                  दिलवाला...

Tuesday, June 7, 2011

.......तमन्ना....

मैंने अपने पलकों पे तमन्ना को सजा रखा है,
दिल में एक एह्शास की शम्मां को जला रखा है,
इंतज़ार में हूँ, इस बरसात को आने दो,
न चल पायेगा फिर मोतियों का पता,
कुछ इस तरह से उनको आँखों में सजा रखा है...
                                      दिलवाला....

Sunday, June 5, 2011

.......तमन्ना.....

आज सुबह उठते ही मैंने दर्पण देखा,
लेकिन ये क्या उसमे मैं नहीं हूँ,
वो तो तमन्ना है, मगर...
आज तमन्ना बड़ी उदास है,
उसकी आँखों में मोती जो है,
और रूह कही जाने को तैयार नहीं,
क्योकि उसकी तमन्ना उदास है...
बहुत सोचा, बहुत ढूँढा फिर,
अचानक उसकी आँखों में देखा,
उसकी नयी आँखों में आज भी वो ही पुराने ख्वाब थे,
फिर रूह को हिम्मत मिली...
और वो चल पड़ी, तमन्ना की खुशी ढूँढने...
ख्वाब पुरे करने....
दुनिया की भीड़ में,
अकेले, अपनी तमन्ना के साथ...

"क्योंकि वक़्त के साथ तमन्ना और भी गहरी और विशाल होती जाती है...."
                                                                                           दिलवाला...

Thursday, May 26, 2011

.....तमन्ना.....


क्या कहे की जिसके पास तमन्ना नहीं होती,
ज़िन्दगी में उनके कोई शम्मां नहीं होती,
मुमकिन नहीं है पल भर भी तमन्ना को भूलना,
वरना धडकनों के साथ वो नादाँ नहीं होती...!!!
                                             दिलवाला....

Tuesday, May 24, 2011

......तमन्ना....


कभी पाषण ह्रदय में भी, एक प्यार की गंगा लाती है,
और कभी खुद ही आँखों से, मोती बन गीर जाती है,
कभी-कभी तो ऐसा लगता, की जैसे कोई रंक नहीं,
और कभी दिल की तमन्ना क़त्ल-ए-आम मचाती है...

मगर वक़्त के साथ ये और भी गहरी और विशाल होती जाती है...
                                                                दिलवाला...

Monday, May 23, 2011

..........तमन्ना........

 
यादों की सरगम तमन्ना, ख्वाबों की घुंघरू तमन्ना,
प्रीतम की एक आह तमन्ना, दिलवाले की चाह तमन्ना,
एक तमन्ना ऐसी देखी, जिसकी अधरों पे अंगारे,
जो छू ले तो होठ जला दें, मंदिर-मस्जिद सी पाक़ तमन्ना...
                                                             दिलवाला.....

...तमन्ना...


मैंने ढूंढा उसे बहुत जमाने की गलियों में,
लेकिन तमन्ना शायद दिल में होती है,
रूह भटकती है बहुत और थक भी जाती है,
मगर तमन्ना न तो मरती है न ही सोती है...!!!
ये वक़्त के साथ और भी गहरी और विशाल होती जाती है...
दिलवाला....

Thursday, April 21, 2011

प्रियतमा आज तुम कुछ अलग सी लगी...

प्रियतमा आज तुम कुछ अलग सी लगी,
देखी नहीं थी मैंने अब तक ऐसी दिल्लगी,

कभी कलम से गुस्ताखी,तो कभी नज़र का तीर,
कितना बचता कोरा दिल,और कैसे सहता पीर,
बस ह्रदय पे नाम लिख दिया प्रियतमा तेरे आँखों ने,
पल में ही ये दिल खो गया तेरी मीठी यादों में,
इस शांत ह्रदय में ऐसी आग कभी पहले नहीं लगी,

प्रियतमा आज तुम कुछ अलग सी लगी...

सपने में तुम रोज़ आती थी, बन परियों की शहजादी,
और अचानक घुप्प अँधेरा, बन जाता आफताबी,
खुले केश तेरे गालों पे ऐसा दृश्य हैं गढ़ देते,
बादलों पे छुपा चाँद, आ रहा हो बन माहताबी,
वो हल्कि मुस्कान तुम्हारी, पहले ऐसी नहीं लगी,

प्रियतमा आज तुम कुछ अलग सी लगी...

                                              दिलवाला....

Thursday, April 14, 2011

... इनकार ...

वो दिल में हमे छुपा के,
हमे इनकार करते है,
हम दुनिया से नज़र बचा के,

उनको प्यार करते है,
कहते है दिल नादाँ है,

क्यों प्यार कर बैठा,
ये जानते है फिर भी,

क्यों इकरार करते है...

कोई दिल में उतर के देखे,

तो गहराई मालूम हो,
किनारों पे खड़े होकर,

बुजदिल शिकार करते है...
वो कलेजे पे रख के खंज़र,

 यूँ इकरार करते है,
की हमसे प्यार कर लो तुम,

की तुमको हम प्यार करते है...
                         दिलवाला....