दिल से दिल को मिलाना,जो न दिखे कहीं,
दीयों को जलाना पर दिल को नहीं,
थक गई है ये आँखे,जो न देखे कहीं,
नफरतों की ये आग कभी बुझती नहीं..
वक़्त संग में है तेरे,दिल मिलाना जरुर,
प्यार का ये दिया,तुम जलाना जरुर,
हिंद से पाक,औ पाक से हिंद को मिलाना यूँ आसान नहीं,
गर आसान नहीं,तो यूँ मुस्किल भी नहीं,
सिर्फ लफ्ते-जिगर में हौशला चाहिए,
दिलवाले के संग काफिला चाहिए,
ये दुनियां को दिखाना जो न दिखता कहीं,
दीयों को जलाना पर दिल को नहीं....
दोस्तों !
बार-बार ये सोचता हूँ,की हमने मंदिरों में और मस्जिदों में अब तक कितने दिए जलाये है,मगर दिल में आज भी वो ही घुप्प अँधेरा छुपाये बैठे है,अक्सर ये होता है की दिवाली में दिए कम दिल ज्यादा जलते है... कुछ दिल सरहद के उस पार तो कुछ दिल सरहद के इस पार,और कुछ तो अपनी सरहदों में रह कर भी सरहद पे जलते है...जब दिल का या हमारे शारीर के किसी भी हिस्से का प्रतिरोपण करना होता है तो हमारा ध्यान कभी भी जाति-विशेष या स्थान-विशेष की ओर नहीं जाता.. क्योंकि शायद उस वक़्त हम जरुरत में होते है...मगर जरूरतें पूरी होने के बाद...फिर से वोही...
तो इस दिवाली पे आपसे बस इतनी गुज़ारिश है...की इस दिलवाले को सफ़र में एक काफिले की तलाश है...उम्मीद है की आप उसकी तलाश को ...
आपके ध्यान में निरंतर...
आपका..
दिलवाला..
Sunday, October 31, 2010
Saturday, October 30, 2010
....दर्दे-बारात....
मुझको हर पल तेरी यादों में,
प्यारी तेरी हर बात लगी,
तन्हाई के मौसम में भी,
महफ़िल सी सौगात लगी,
तारीफ नूर की जहाँ भी चली,
तुझमे बढ़कर हर बात मिली..
आफशोस नहीं इसका हमने,
इज़हार नहीं किया तुमसे,
इत्तेफाक की जब भी मिला तुमसे,
तब लोगों की जामात मिली....
दुनियां का साथ तुमने भी दिया,
और मुझको दर्दे-बारात मिली....
दोस्तों !
ये मेरी दूसरी कविता है जो मै आप सबकी नज़र पेश कर रहा हूँ .. उम्मीद है की आपकी पुरानी कुछ यादें तारो-ताज़ा हो जाएँगी.. और आपके अन्दर छुपे हुए दिलवाले की धड़कने आपको फिर से पिछली यादों में ले जाएँगी...
धन्यवाद !
आपके धड़कनों की ध्यान में निरंतर...
आपका...
दिलवाला..
प्यारी तेरी हर बात लगी,
तन्हाई के मौसम में भी,
महफ़िल सी सौगात लगी,
तारीफ नूर की जहाँ भी चली,
तुझमे बढ़कर हर बात मिली..
आफशोस नहीं इसका हमने,
इज़हार नहीं किया तुमसे,
इत्तेफाक की जब भी मिला तुमसे,
तब लोगों की जामात मिली....
दुनियां का साथ तुमने भी दिया,
और मुझको दर्दे-बारात मिली....
दोस्तों !
ये मेरी दूसरी कविता है जो मै आप सबकी नज़र पेश कर रहा हूँ .. उम्मीद है की आपकी पुरानी कुछ यादें तारो-ताज़ा हो जाएँगी.. और आपके अन्दर छुपे हुए दिलवाले की धड़कने आपको फिर से पिछली यादों में ले जाएँगी...
धन्यवाद !
आपके धड़कनों की ध्यान में निरंतर...
आपका...
दिलवाला..
Friday, October 29, 2010
....ख्याल ....
हमे हर वक़्त सिर्फ उनका ख्याल है,
इसलिए नहीं की मेरा प्यार बेमिसाल है,
कांटे चमन के कफ़न है हमारे,
गुलाबों से उनकी जिंदगी खुशहाल है,
प्यार करने की जग में इजाजत नहीं,
उनको याद करना भी एक सवाल है,
दुनिया-वाले जुदाई की देंगे सजा ,
गर पता चल गया हमे किसका ख्याल है....
यूँ तो अक्सर ख्याल मन में आते रहते है,लेकिन खयालों को शब्दों की मोतियों से सजाना एक अलग बात है... और इस कला में निपुण मेरे गुरु स्वर्गीय श्री हरिवंश राय बच्चन (मेरे दिल ने उनको ही अपना गुरु मन है...हालाँकि मैंने उनको न तो देखा है और न उनके बारे में ज्यादा जानता हूँ...मगर फिर भी उनकी मधुशाला हर एक की जिंदगी का दर्शन है ऐसा मेरा मानना है...)हैं ,उम्मीद है की मेरी ये पहली कविता आप लोगों को पसंद आएगी और मुझे आगे लिखने के लिए प्रेरित करेंगे..
आपके ख्वाब में निरंतर
आपका,
दिलवाला...
इसलिए नहीं की मेरा प्यार बेमिसाल है,
कांटे चमन के कफ़न है हमारे,
गुलाबों से उनकी जिंदगी खुशहाल है,
प्यार करने की जग में इजाजत नहीं,
उनको याद करना भी एक सवाल है,
दुनिया-वाले जुदाई की देंगे सजा ,
गर पता चल गया हमे किसका ख्याल है....
यूँ तो अक्सर ख्याल मन में आते रहते है,लेकिन खयालों को शब्दों की मोतियों से सजाना एक अलग बात है... और इस कला में निपुण मेरे गुरु स्वर्गीय श्री हरिवंश राय बच्चन (मेरे दिल ने उनको ही अपना गुरु मन है...हालाँकि मैंने उनको न तो देखा है और न उनके बारे में ज्यादा जानता हूँ...मगर फिर भी उनकी मधुशाला हर एक की जिंदगी का दर्शन है ऐसा मेरा मानना है...)हैं ,उम्मीद है की मेरी ये पहली कविता आप लोगों को पसंद आएगी और मुझे आगे लिखने के लिए प्रेरित करेंगे..
आपके ख्वाब में निरंतर
आपका,
दिलवाला...
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