आज सुबह उठते ही मैंने दर्पण देखा,
लेकिन ये क्या उसमे मैं नहीं हूँ,
वो तो तमन्ना है, मगर...
आज तमन्ना बड़ी उदास है,
उसकी आँखों में मोती जो है,
और रूह कही जाने को तैयार नहीं,
क्योकि उसकी तमन्ना उदास है...
बहुत सोचा, बहुत ढूँढा फिर,
अचानक उसकी आँखों में देखा,
उसकी नयी आँखों में आज भी वो ही पुराने ख्वाब थे,
फिर रूह को हिम्मत मिली...
और वो चल पड़ी, तमन्ना की खुशी ढूँढने...
ख्वाब पुरे करने....
दुनिया की भीड़ में,
अकेले, अपनी तमन्ना के साथ...
"क्योंकि वक़्त के साथ तमन्ना और भी गहरी और विशाल होती जाती है...."
दिलवाला...
लेकिन ये क्या उसमे मैं नहीं हूँ,
वो तो तमन्ना है, मगर...
आज तमन्ना बड़ी उदास है,
उसकी आँखों में मोती जो है,
और रूह कही जाने को तैयार नहीं,
क्योकि उसकी तमन्ना उदास है...
बहुत सोचा, बहुत ढूँढा फिर,
अचानक उसकी आँखों में देखा,
उसकी नयी आँखों में आज भी वो ही पुराने ख्वाब थे,
फिर रूह को हिम्मत मिली...
और वो चल पड़ी, तमन्ना की खुशी ढूँढने...
ख्वाब पुरे करने....
दुनिया की भीड़ में,
अकेले, अपनी तमन्ना के साथ...
"क्योंकि वक़्त के साथ तमन्ना और भी गहरी और विशाल होती जाती है...."
दिलवाला...
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