Saturday, August 6, 2011

......दोस्त.....

एक दोस्त मिला ऐसा जिसने वफ़ा किया,
सौ ज़ुल्म हुए उसपे, उसने न कुछ कहा,
एक दोस्त मिला ऐसा जिसने वफ़ा किया..

मैं बेखबर था उससे दुनिया की रंग में,
वो साया बन के रहता था हरदम संग में,
एक आंधी चली अचानक, जिसकी न थी खबर,
वो बोल के चला गया तुझे लग जाये मेरी उम्र,
मेरी दोस्ती की खातिर सबको भुला दिया,
एक दोस्त मिला ऐसा जिसने वफ़ा किया...
एक दोस्त मिला ऐसा जिसने वफ़ा किया...


"मेरे दोस्त, मुझे तुम्हारी बहुत याद आती है...."
                                                  दिलवाला...

3 comments:

  1. सुंदर कविता ...हैप्पी फ्रेंडशिप डे

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  2. upadhyay ji,
    Bahut hi sundar kavita rachi hai aapne.

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  3. ऐसे दोस्त आज भी होते हैं - प्रेरक एवं सार्थक प्रस्तुति

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