मुझको हर पल तेरी यादों में,
प्यारी तेरी हर बात लगी,
तन्हाई के मौसम में भी,
महफ़िल सी सौगात लगी,
तारीफ नूर की जहाँ भी चली,
तुझमे बढ़कर हर बात मिली..
आफशोस नहीं इसका हमने,
इज़हार नहीं किया तुमसे,
इत्तेफाक की जब भी मिला तुमसे,
तब लोगों की जामात मिली....
दुनियां का साथ तुमने भी दिया,
और मुझको दर्दे-बारात मिली....
दोस्तों !
ये मेरी दूसरी कविता है जो मै आप सबकी नज़र पेश कर रहा हूँ .. उम्मीद है की आपकी पुरानी कुछ यादें तारो-ताज़ा हो जाएँगी.. और आपके अन्दर छुपे हुए दिलवाले की धड़कने आपको फिर से पिछली यादों में ले जाएँगी...
धन्यवाद !
आपके धड़कनों की ध्यान में निरंतर...
आपका...
दिलवाला..
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