मैंने अपने पलकों पे तमन्ना को सजा रखा है,
दिल में एक एह्शास की शम्मां को जला रखा है,
इंतज़ार में हूँ, इस बरसात को आने दो,
न चल पायेगा फिर मोतियों का पता,
कुछ इस तरह से उनको आँखों में सजा रखा है...
दिलवाला....
दिल में एक एह्शास की शम्मां को जला रखा है,
इंतज़ार में हूँ, इस बरसात को आने दो,
न चल पायेगा फिर मोतियों का पता,
कुछ इस तरह से उनको आँखों में सजा रखा है...
दिलवाला....
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ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना, बधाई
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