माँ की लोरियां,दादा जी के कंधे...
दादी की कहानियां,बाबु जी का प्यार...
तुम मानो या न मानो ,मुझे अब भी याद आता है...
वो बचपन की शरारतें...
और ,माँ के रुखी हुई हाथो की मार..
वो अमरुद के बहाने ,उसकी आँगन में जाना ..
उसे साथ ले जाने के लिए ,रस्ते में डरते हुआ जाना...
वो बगीचे की डालियाँ ,वो झूले का प्यार...
तुम मानो या न मानो ,मुझे अब भी याद आता है...
वो बचपन की शरारतें...
और ,माँ के रुखी हुई हाथो की मार..
उससे मिलने के लिए ,स्कुल से भाग आना...
किसी-किसी बहाने से ,नंगे पाँव भूतिया पीपल तक जाना...
वो मिटटी के घरौदे ,वो गुड्डे-गुड्डी का प्यार...
तुम मानो या न मानो ,मुझे अब भी याद आता है...
वो बचपन की शरारतें...
और ,माँ के रुखी हुई हाथो की मार...
दिलवाला....
दादी की कहानियां,बाबु जी का प्यार...
तुम मानो या न मानो ,मुझे अब भी याद आता है...
वो बचपन की शरारतें...
और ,माँ के रुखी हुई हाथो की मार..
वो अमरुद के बहाने ,उसकी आँगन में जाना ..
उसे साथ ले जाने के लिए ,रस्ते में डरते हुआ जाना...
वो बगीचे की डालियाँ ,वो झूले का प्यार...
तुम मानो या न मानो ,मुझे अब भी याद आता है...
वो बचपन की शरारतें...
और ,माँ के रुखी हुई हाथो की मार..
उससे मिलने के लिए ,स्कुल से भाग आना...
किसी-किसी बहाने से ,नंगे पाँव भूतिया पीपल तक जाना...
वो मिटटी के घरौदे ,वो गुड्डे-गुड्डी का प्यार...
तुम मानो या न मानो ,मुझे अब भी याद आता है...
वो बचपन की शरारतें...
और ,माँ के रुखी हुई हाथो की मार...
दिलवाला....
सच में बचपन की यादें साथ रहती हैं हमेशा.सुन्दर अभिव्यक्ति
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